TOP KHANA​

जालौर किले में बना तोपखाना बहुत अद्भुत है। यह परमार राजा भोजक द्वारा निर्मित एक संस्कृत पाठशाला थी, जो बाद में दुर्ग के मुस्लिम अधिपतियों द्वारा मस्जिद में परिवर्तित कर दी गई थी तथा इसका नाम तोपखाना मस्जिद रख दिया गया था। जालौर शहर के बीचों बीच स्थित तोपखाना, कभी एक भव्यशाली संस्कृत विद्यालय था। जिसे राजा भोज ने 7वीं और 8वीं शताब्दियों के बीच बनवाया था। राजा भोज जो स्वयं संस्कृत के एक अच्छे विद्वान् थे, उन्होंने अजमेर और धार में शिक्षा प्रदान करने के लिए इसके समान कई विद्यालय बनवाए थे। आजादी के पूर्व की अवधि के दौरान अधिकारियों ने तोपखाने के रूप में गोला बारूद के संग्रह आौर निर्माण के लिए इमारत का इस्तेमाल करने के बाद, स्कूल का नाम बदलकर तोपखाना रख दिया था। यद्यपि आज इस भवन का स्थापत्य जीर्ण-शीर्ण हालत में है, लेकिन अभी भी ये अत्यंत प्रभावशाली है और पत्थर की नक्काशियों से सजा है। तोपखाना दोनों तरफ से दो मंदिरों के मध्य स्थित है जिनमें अब मूर्तियाँ स्थापित नहीं हैं। माना जाता है कि तोपखाना का सबसे प्रभावशाली स्थल एक कमरा है जो भवन के फर्श से 10 फीट ऊपर एक भव्य सीढ़ी के साथ बनाया गया है। ऐसा माना जाता है कि यह स्कूल के हैडमास्टर का निवास स्थान है।

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